{"product_id":"b078hs3b65","title":"Valmiki Ramayan Anuwad Sahit Part 01, Code 0075, Sanskrit Hindi, Gita Press Gorakhpur (Official) (Hindi Edition)","description":"\u003cp\u003eश्रीमद् वाल्मिकीय रामायण (प्रथम खण्ड) - त्रेतायुगमें महॢष वाल्मीकिके श्रीमुखसे साक्षात् वेदोंका ही श्रीमद्रामायणरूपमें प्राकट्य हुआ था, ऐसी आस्तिक जगत्की मान्यता है। अत: श्रीमद्रामायणको वेदतुल्य प्रतिष्ठा प्राप्त है। धराधामका आदिकाव्य होनेके कारण इसमें भगवान्के लोकपावन चरित्रकी सर्वप्रथम वाङ्मयी परिक्रमा है। इसके एक-एक श्लोकमें भगवान्के दिव्य गुण, सत्य, सौहार्द, दया, क्षमा, मृदुता, धीरता, गम्भीरता, ज्ञान, पराक्रम, प्रजा-रंजकता, गुरुभक्ति, मैत्री, करुणा, शरणागत-वत्सलता-जैसे अनन्त पुष्पोंकी दिव्य सुगन्ध है। मूलके साथ सरस हिन्दी अनुवादमें दो खण्डोंमें उपलब्ध, सचित्र, सजिल्द।\u003c\/p\u003e","brand":"ANT","offers":[{"title":"Ebook","offer_id":52821047476440,"sku":"YSL36657","price":5.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0835\/3356\/2072\/files\/91rQKnCk3JL._SY1500.jpg?v=1793099281","url":"https:\/\/www.bookmebay.com\/products\/b078hs3b65","provider":"BookMebay","version":"1.0","type":"link"}